सिंधु सभ्यता की अर्थव्यवस्था समाज और धर्म का वर्णन करें

सिंधु घाटी सभ्यता में अर्थव्यवस्था का आधार निम्नलिखित था।
  1. कृषि
  2.  पशुपालन 
  3. व्यापार 
  4. शिल्पा

          सिंधु घाटी सभ्यता में कृषि

सिंधु घाटी सभ्यता से 9 प्रकार के फसलों का साक्ष्य मिलते हैं चावल, गेहूं, मटर, खरबूज, कपास, खजूर, बांसीका, जूँसी, दो किस्म के जाव मिलते हैं। चावल के साथ साक्ष्य लोथल से मिलता है। 

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग विश्व में सबसे पहले कपास की खेती करना शुरू किए थे मेहरगढ़ से कपास का साक्ष्य मिलता है। 

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग खेतों को जोत कर कृषि कार्य किया करते थे कालीबंगा से जूते हुए खेत के साक्ष्य तथा वनवाली से मिट्टी के बने हुए हल के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं सिंधु घाटी सभ्यता के लोग नदियों के द्वारा खेती की सिंचाई करते थे परंतु कहीं नहाने के भी साक्ष्य मिले हैं जो कि धोलावीरा से बेहतर जल प्रबंधन के साथ मिले है।

         सिंधु घाटी सभ्यता में पशुपालन

इस सभ्यता में गोबर बैल गाय बकरी सूअर आदि को पालतू बना रखा था इस सभ्यता को लोग अभी घोड़ा से परिचित नहीं थे ।

         सिंधु घाटी सभ्यता में व्यापार

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग आंतरिक तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार किया करते थे इनके व्यापार जो होते थे फारस (ईरान) तथा मेसोपोटामिया (इराक) से होता था अफगानिस्तान से वदाख्शॉ से इस सभ्यता के लोग लाजवर्त नामक पत्थर का आयात करते थे।

       सिंधु घाटी सभ्यता में शिल्प

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग तांबा, पीतल, कासा सोना,चांदी से परिचित थे इन्हें गलाकर सांचे में ढालने जानते थे इस पद्धति के द्वारा वे मूर्तियॉ बनाया करते थे।मोहनजोदारो से काशो की नर्तकी के साक्ष्य मिले हैं ।

इस सभ्यता के लोग सेलखड़ी की मुहरे बनाना जानते थे उनके मुहावरे आयताकार होती थी परंतु लोथल में जो फारस के मोहरे मिले हैं वह गोलाकार होते हैं
सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे से परिचित नहीं थे । 

सिंधु घाटी सभ्यता का धर्म

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग मातृदेवी की पूजा करते थे मातृदेवी कई मिट्टी की मूर्तियां इस सभ्यता के स्थलो से प्राप्त हुए हैं।

मोहनजोदड़ो से एक पत्थर के योगी के मूर्ति मिली हैं इसके दाई ओर चीता तथा हाथी बाई और गेंडा तथा भैसा के चित्र मिलते हैं इतिहासकार पशुपति शिव की मूर्ति मानते हैं इस सभ्यता के कई स्थलों से कुबड वाला बैल वृषण मिला है। इस शुभ माना जाता है।

पीपल के वृक्ष तथा एक सिंह वाला पशु की भी पूजा की जाती है इस सभ्यता के लोग ताबीज धारण करते थे तथा उन्हें भूत प्रेत में इनका विश्वास था ।
सिंधु घाटी सभ्यता का समाज

इस सभ्यता का समाज 4 नगरों में विभाजित था
(i) योद्व
(ii) व्यापारी 
(iii) विद्वान 
(iv) कामगार

वैदिक काल के चार वर्ण ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य तथा क्षेत्र के बीच सिंधु घाटी सभ्यता में दिखते हैं ।
इस सभ्यता में सबसे अच्छे स्थिति व्यापारियों के थी वह धनी थे तथा राज्य कार्य की जिम्मेदारी व्यापारियों के हाथों में थी।

व्यापारी के आवास नगरों के पश्चिम टीला पर स्थित दुर्ग या टीला में मिलते हैं।

इस सभ्यता में स्त्रियों की स्थिति अच्छी थी इस सभ्यता का समाज मातृसत्तात्मक समाज था स्त्रीयॉ प्रायः घाघरा पहनती थी तथा आभूषण से लदी रहती थी पुरुष भी आभूषण प्रेमी थे वे शतरंज तथा पासे का खेल खेला करते थे।

इस सभ्यता के लोग शव को दफनाने और जलाने जानते थे।

सिंधु घाटी सभ्यता के माप तौल

इस सभ्यता के लोग वस्तु को मापना तथा तौलना जानते थे वस्तुओं को तौलने के लिए तराजू तथा वाट का प्रयोग करते थे मोहनजोदड़ो से तराजू के साक्ष्य मिलते हैं
वॉट 16 के गुणों से बनाए जाते थे जैसे -16,32,48,64 आदी

वस्तु को मापने के लिए स्केल का प्रयोग किया करते थे इसके स्केल घन तथा फुट पर आधारित होते थे। गुजरात के लोथल से तांबे के स्केल मिले हैं ।