भारत पर मुस्लिम आक्रमण

muslim aakraman in india


भारत पर मुसलमानों ने तीन आक्रमण ने भारत के सामाजिक राजनीतिक तथा आर्थिक परिवर्तन ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

  • अरबों का आक्रमण
  • मोहम्मद गजनी का आक्रमण
  • मोहम्मद गौरी का आक्रमण 

अरबों का आक्रमण

आठवीं शताब्दी के शुरुआत में अरब का शासक अल -हज्जाज था उसका भतीजा तथा दामाद मोहम्मद बिन कासिम था इस समय सिंध का राजा दाहिर का शासन था। अतः अल हज्जाज ने यह बहाना बनाते हुए दहिर को कहा कि उसके सामने से भरी जहाज देवल बंदरगाह को लूट लिए गए हैं। देवल सिंधु नदी के मुहाने पर स्थित एक बंदरगाह था । इसका जवाब देते हुए दाहिर ने कहा कि देवल का क्षेत्र मेरे राज्य के अंतर्गत नहीं आता है। अतः जहाज को लूटने वालों को दंड नहीं दे सकता इस पर क्रोध होकर अलहाज ने अपने भतीजे,दामाद मोहम्मद बिन कासिम को सिंध राज्य पर आक्रमण के लिए भेजा। मोहम्मद कासिम ने 712 ईसवी में सिंध पर आक्रमण किया। सिंध राज्य में बौद्ध भिक्षु की संख्या अधिक थी। उसने संबंध दाहिर के संबंध अच्छे नहीं थे। अतः बौद्ध भिक्षुओं ने मोहम्मद बिन कासिम का साथ दिया। अतः इस युद्ध में मोहम्मद बिन कासिम की जीत हुई और दाहिर हार गया और सिंधी राज्य पर अरबों का आधिपत्य हो गया।


मोहम्मद बिन कासिम भारत पर आक्रमण करने वाला पहला मुसलमान था । मोहम्मद बिन कासिम अरब के आक्रमण तथा सिंध क्षेत्र में साम्राज्य निर्माण का प्रभाव भारत में निम्न रूप से पड़ा।

  • भारत के लोग पहली बार जजिया कर से परिचित हुए जजिया कर गैर मुसलमानों पर लगाया कर था। 

  • भारत में सबसे पहले जजिया कर मोहम्मद बिन कासिम ने लगाया था।

  • भारत में सर्वप्रथम ऊंट पालन का विकास हुआ था।

  • भारत के लोग खजूर की खेती करने लगे।

इस हमले ने अरब जगत को भी प्रभावित किया। भारत के रामायण महाभारत आदि ग्रंथों को अरबी भारत ले गए तथा इसका अनुवाद अरबी फारसी में करवाए।

अरबों का भारत पर आक्रमण का वर्णन चचनामा नामक पुस्तक में मिलता है।

अल्पगतीन एक तुर्क मुसलमान था वह यामिनी वंश का था। उसने अफगानिस्तान के गजनी क्षेत्र में एक राज्य की स्थापना की थी। 

अल्पगतीन का पुत्र सुबक्त्गीन था । सुबक्त्गीन ने हिंदू साईं राज्य के शासक जयपाल पर हमला किया था। जयपाल पर किया गया हमला तुर्को द्वारा भारत पर किया जाने वाला पहला हमला था । सुबक्त्गीन का पुत्र मोहम्मद गजनी था ।


मोहम्मद गजनी महत्वाकांक्षी था वह अपने क्षेत्र में एक बड़ा साम्राज्य स्थापना करना चाहता था। इसके लिए उसे धन की आवश्यकता थी। अतः मोहम्मद गजनी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया।

                         इतिहासकारों के अनुसार इसके बगदाद के खलीफा कादिर बिल्लाह के सामने संकल्प लिया था कि वह भारत पर प्रतिवर्ष आक्रमण करेगा इससे खुश होकर मोहम्मद गजनी को यामीन -उददौला (इस्लाम का दाहिना हाथ) यामिनी- उह -मिल्लाह (मुसलमान का संरक्षण) उपाधि दी थी। मोहम्मद गजनवी के भारत मेें आक्रमण के तीन महत्वपूर्ण कारण थे।

  • भारत से धान लूटना
  • प्रसिद्धी हासिल करना
  • इस्लाम का प्रचार करना

मोहम्मद गजनी विद्वानों का संरक्षक था उस के दरबार में निम्नलिखित प्रमुख विद्वान थे।

अलबरूनी

यह मोहम्मद गजनी के साथ भारत आया था इसने अरबी भाषा में किताबुल - हिंद या तारीखे -हिन्द नामक पुस्तक की रचना की।अलबरूनी पहला मुसलमान था जो पुराण का अध्ययन किया था।

उत्बी

उत्वी मोहम्मद गजनी का दरबारी इतिहासकार था। इसकी पुस्तक है । तारीख -ए -यामिनी या किताब -उल -यामिनी।

फिरदौसी

फिरदौसी फारसी भाषा में लिखने वाला विद्वान था। उसने फारसी भाषा की प्रथम पुस्तक शाहनामा लिखि । फिरदौसी की फारसी भाषा का जन्मदाता कहा जाता है।


महमूद गजनी ने 1001 से 1027 के बिच 17 बार भारत पर आक्रमण किया। इसके कुछ प्रमुख आक्रमण निम्नलिखित है।

  1.  पेशावर पर आक्रमण :-  पेशावर का हिंद साईं राजा जयपाल था मोहम्मद गजनी ने पेशावर पर हमला कर राजा जयपाल को हरा दिया जयपाल ने आनंदपाल को गद्दी पर बैठा कर खुद आत्महत्या कर लिया । पेशावर पर आक्रमण गजनी का पहला आक्रमण था।
  2. भटिंडा पर आक्रमण :-  1004 ईस्वी में गजनी ने पंजाब के भटिंडा राज्य पर आक्रमण किया तथा वहां के राजा को पराजित किया।
  3. वैहिन्द का आक्रमण :-  1009 विश्व मोहम्मद गजनी ने वहिन्द पर आक्रमण किया और वहां के राजा को हराया।
  4. कन्नौज पर आक्रमण :-  1018 में गजनी ने कन्नौज पर आक्रमण किया तथा वहां के राजा को हराया।
  5. सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण :-  गुजरात के सोमनाथ मंदिर एक प्रसिद्ध शिव मंदिर था । यह मंदिर धन से भरा पड़ा था ।मोहम्मद गजनवी 1125 ईसवी में सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया । इस मंदिर को उसने पूरी तरह से लूटा। मंदिर तथा मूर्ति तोड़फोड़ कर हानि पहुंचाई।
  6. जाटों पर आक्रमण :-  भारत के उत्तर पश्चिम भाग में जाटों का निवास था। जब सोमनाथ मंदिर को लूट कर मुहम्मद गजनी वापस लौट रहा था तो इस जाटों ने इस पर बाधा उत्पन्न किया था। इससे क्रोधित होकर 1127 में मोहम्मद गजनी ने जाटों पर हमला किया, और इसे हराया जाटों पर किया गया हमला मोहम्मद गजनी के द्वारा अंतिम हमला था।   

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-सतनामा के लेखक फिरदोसी पूर्व का होमर कहा जाता है। होमर यूनान का कवि था इसके 2 पुस्तकें प्रसिद्ध है ।

इलियाड और ओडैशी

-मोहम्मद गजनी द्वारा 1025 में सोमनाथ मंदिर को हानि पहुंचाई गई थी 1026 ईसवी में चालूक्य वंश का राजा भीम पाल (भिम-। ) 1775 में अहिल्याबाई होलकर ने तथा 1950 में पटेल नें इसकी मरम्मत करवाई I


- यामिनी वंश (गजनी) वंश का अंतिम शासक खुसरो मलिक था। खुसरो मालिक को मोहम्मद गौरी ने 1192 ई. में कैद कर मार डाला तथा गजनी को अपने राज्य में मिला लिया।


महमूद गजनी का पुत्र सुल्तान महमूद था।


        

इसका असली नाम मौजूददीन मोहम्मद बिन शाम था। 

1.मुल्तान पर आक्रमण

मुल्तान पाकिस्तान में एक छोटा सा राज्य था 1175 इसमें में मोहम्मद गौरी ने मुल्तान पर आक्रमण कियाI इसने मुल्तान के कर्ममाथी शासक को हराया। मुल्तान पर किया गया हमला मोहम्मद गौरी का भारत पर पहला आक्रमण था।

2.दूसरा आक्रमण

मोहम्मद गोरी ने 1178 ई. में गुजरात पर आक्रमण किया। इस समय गुजरात का मूलराज द्वितीय था । मूलराज द्वितीय ने गौरी को बुरी तरह पराजित किया था

3.तबरहिन्द पर आक्रमण

तबरहिंद पाकिस्तान का एक छोटा सा राज्य था मोहम्मद गोरी ने 1180 से 1190 के बीच उस पर हमला कर उसके शासक को पराजित किया ।

4.तराईन का प्रथम युद्ध

1191 में मोहम्मद गौरी ने अजमेर पर आक्रमण किया अजमेर पृथ्वीराज चौहान तृतीय की राजधानी थी और मोहम्मद गौरी तथा पृथ्वीराज चौहान तृतीय के बीच तराइन का प्रथम युद्ध हुआ इसमें पृथ्वीराज चौहान की जीत हुई।

5.तराइन का द्वितीय युद्ध

मोहम्मद गौरी ने विमान -उल -मुल्क को पृथ्वीराज चौहान के दरबार में अपने इस संदेश के साथ भेजा की। पृथ्वीराज चौहान इसका अधीनता स्वीकार कर ले पृथ्वीराज चौहान इसके अधीनता स्वीकार नहीं करता है। 1192 ई. में दोनों के बीच युद्ध होता है इसमें मोहम्मद गौरी की जीत हुई और पृथ्वीराज चौहान बंधी बना लिया गया तथा मार दिया गया।

मोहम्मद गौरी के सेना से पृथ्वीराज चौहान से लड़ने वाला सेनापति खंडेराव था।

हसन इमाम की पुस्तक ताजुलनर्सरी से भी पृथ्वीराज चौहान तथा गौरी के संबंध में जानकारी मिलते हैं।

तराइन का द्वितीय युद्ध भारतीय इतिहास का निर्णायक युद्ध माना जाता है क्योंकि इस युद्ध में गोरी ने पृथ्वीराज चौहान को हराया था। जो उत्तर पश्चिम का सबसे बड़ा राजा था इस हार के बाद उत्तर पश्चिम भारत में मोहम्मद गोरी ने तुर्क शासक की स्थापना की।

नोट

भारत में तुर्की शासक का स्थापित करने का श्रेय मोहम्मद गौरी को जाता है।

6.कन्नौज पर आक्रमण

इस समय कन्नौज के राजा जयचंद था वह गढ़वाड वंश का था जयचंद तथा मोहम्मद गौरी के बीच 1194 ई . में चंदावर का युद्ध हुआ इस युद्ध में जयचंद्र की हार हुई।

नोट -

  • मोहम्मद गौरी के सिक्के पर एक ओर काली मां तथा दूसरी और लक्ष्मी के चित्र बने मिलते हैं
  • सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती मोहम्मद गोरी के साथ 1192 ई. में तराइन के द्वितीय युद्ध के समय भारत आया तथा वह अजमेर में बश गया।
  • भारत में एकता प्रथा का शुरुआत करने वाला मोहम्मद गौरी था। परंतु इल्तुतमिश ने इक्ता प्रथा को संस्थागत रूप दिया। 1206ई. में मोहम्मद गौरी की मृत्यु हो गई इसकी हत्या उत्तर पश्चिम के खोखरो एंव जाटों ने उसकी हत्या कर दी।

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