सिंधु घाटी सभ्यता के कला एवं नगर योजना

सिंधु घाटी सभ्यता के लोग सेलखड़ी की मोहर बनाने की कला जानते थे । इन मोहर पर भाव चित्रात्मक लिपि में लिखे हुए लेख मिलते हैं इस लिपि के 64 मूल चिन्ह थे इन्ही मूल्य चिन्हों के आधार पर इस सिंधु सभ्यता के लोग भाव चित्रात्मक लिपि में लेख लिखा करते थे । यह लिपि दाएं से बाएं लिखी जाती थी इसके मुहरो पर पशु तथा पक्षियों के चित्र बने होते थे उनके मोहरे पर एक सीधी साड के चित्र बड़ी संख्या में देखने को मिलते है ।
मोहनजोदड़ो से मिले मुहरों पर पशुपति शिव के चित्र मिलते हैं ।
मोहनजोदारो  तथा लोथल के मोहरे पर नाव के चित्र मिलते हैं इसका तात्पर्य है कि भारत के लोग सागरीय व्यापार तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार किसी दूसरे देशों के साथ था ।

कालीबांग, मोहनजोदारो तथा लोथल से राज्य मुद्रक मिलता है इसका प्रयोग व्यापार की वस्तुओं पर चिन्ह ( ठप्पा ) लगाने के लिए किया जाता था।
सिंधु घाटी सभ्यता के लोग मिट्टी के मूर्ति, धातु की मूर्ति तथा पत्थरों की मूर्तियां बनाने जानते थे ।मोहनजोदड़ो से कासे नर्तकी की मूर्तियां मिलती है ।

मोहनजोदड़ो से पत्थर की एक ऐसी मूर्ति मिलती है जिसकी दाढ़ी तो है परंतु मुझे नहीं है तथा बाल बड़े -बड़े हैं तथा जोड़े से बंधे हुए हैं उसकी आंखें आधी खुली हुई है इतिहासकार इसे सन्यासी या योगी या पुरोहित की मूर्ति मानते हैं ।

मोहनजोदड़ो से बिना सिर के नग्न पत्थर के दो मूर्तियां मिलते हैं जो कि बिना वस्त्र हीन है ।मोहनजोदारो से एक ऐसी पशु की पत्थर की मूर्ति मिलती है जिसका शरीर भेड़ जैसा तथा सिर हाथी जैसा है इतिहासकार मानते हैं कि इस मूर्ति का कोई धार्मिक महत्व रहा होगा ।

सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना

सिंधु घाटी सभ्यता एक नगरिय सभ्यता थी यहां के लोगों को नियोजन के द्वारा बसाया गया था।


इस नगर की निम्नलिखित विशेषताएं थी

(i)  इस सभ्यता की सबसे प्रमुख विशेषताएं इसकी सड़क योजना है सड़के एक दूसरों के समकोण पर करती थी।

(ii) सड़क के दोनों किनारों पर मकान बने हुए थे मकान के बीच आगन होते थे । तथा आंगन के चारों तरफ कमरे होते थे पर एक मकान में स्नान करने का एक स्नानघर होता था तथा रसोईघर भी होता था । 

(iii) सिंधु घाटी सभ्यता प्रायः मकान कच्ची ईंटों से बने बनाए गए होते थे परंतु मोहनजोदारो के मकानों में पक्की ईंटों का प्रयोग किया गया था।

(iv) सड़कों के किनारे समांतर नदिया बनाई गई थी नदियों में पक्की ईंटों का प्रयोग किया जाता था । मकानों की खिड़कियों ऊंचाई पर लगाई जाती थी तथा दरवाजे में लकड़ी की किवाड़ बने होते थे ।