आर्य समाज के संस्थापक कौन हैं

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आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती थे इनका बचपन का नाम मूल शंकर था इनका जन्म गुजरात के कट्ठीवाड़ा जिले के मोरबी नामक गांव में हुआ था वह बचपन से ही अपना घर त्याग दियें और मथुरा आकर विरजानंद को अपना गुरु बना लिया था और उन्होंने वेदों को गंभीर रूप से अध्ययन किया और अध्यान करने के बाद यह निष्कर्ष निकाले कि वेंद ईश्वर ज्ञान से भरा पड़ा है इसलिए उन्होंने यह नारा दिया वेदों की ओर लौटो ।

दयानंद सरस्वती ने विरजानंद के प्रेणा से 1875 ईसवी में बंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी इस समाज के द्वारा दयानंद ने मूर्ति, पूजा, कर्मकांड, छुआछूत, श्राद्ध कर्म, दहेज प्रथा आदि का विरोध किया था ।

दयानंद सरस्वती ने हिंदू धर्म को सर्वोपरि माना सर्व परी का मतलब सबसे ऊंचा माना । उसने शुद्धि आंदोलन चलाया शुद्धि आंदोलन इसलिए चढ़ाया गया था मुसलमान शासकों ने बड़ी संख्या में हिंदुओं को मुसलमान धर्म में परिवर्तित कर दिया गया था। अतः शुद्धि आंदोलन हिंदू धर्म में पून : लौटने का अवसर  प्रदान करता था ।

दयानंद सरस्वती ने अपने विचार को सत्यार्थ प्रकाश नामक पुस्तक में संकलित किया है ।
सत्यार्थ प्रकाश नामक संस्कृत भाषा में लिखी गई पुस्तक है । उन्होंने अंग्रेजी भाषा में चुनौती देते हुए यह कहा था कि अच्छे से अच्छा विदेशी शासन बुरे से बुरे देसी शासन से खराब होता है स्वदेशी और देशभक्ति के समर्थक थे । दयानंद सरस्वती ने स्वदेशी आंदोलन चलाया था ।

वैलेंटाइन शिरोल आर्य समाज दयानंद सरस्वती को भारतीय अशांति का जन्मदाता कहा जाता है|

दयानंद सरस्वती के तीन प्रबल समर्थक थे ।
(i) लाला लाजपत राय 
(ii) लाला हंसराज 
(iii) श्रद्धानंद

1886 ई. में दयानंद सरस्वती की मृत्यु हो गई उनकी मृत्यु के बाद आर्य समाज को दो भागों में विभाजित कर दिया गया ।

(1) वैसे लोग जो स्वदेशी शिक्षा के समर्थक थे ।
(2) वैसे लोग जो स्वदेशी शिक्षा के साथ-साथ पश्चात शिक्षा के भी समर्थक थे। श्रद्धानंद स्वदेशी शिक्षा के समर्थन थे। अतः उन्होंने पुणे से 2 ईसवी में हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी की स्थापना की थी । हंसराज स्वदेशी के साथ-साथ पश्चात शिक्षा के भी समर्थक थे उन्होंने दयानंद एंग्लो वैदिक स्कूल (DAV) की स्थापना की थी।