वारेन हेस्टिंग्स प्रशासन न्यायिक सुधार

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वारेन हेस्टिंग्स ईस्ट इंडिया कंपनी का क्लर्क था परंतु प्रतिभावान होने के कारण अंग्रेजी सरकार ने उसे बंगाल का गवर्नर बनाया। 1773 ईसवी में रेगुलेटिंग एक्ट लागया इस एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर जनरल कर दिया गया तथा बंगाल के गवर्नर जनरल के अंतर्गत मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी के शासन जमीदारी सौंप दी गई।

नोट -: बंगाल का अंतिम गवर्नर तथा प्रथम गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स था।

वारेन हेस्टिंग्स अपने निम्नलिखित कार्यों के लिए भारतीय इतिहास में जाना जाता है - :


• 1772 इसमें उसने द्वैध शासन का अंत कर दिया तथा नवाब को पेंशन देकर शासन से बेदखल कर दिया।



• इसने घेरे की नीति अपनाया था।
इसने कोलकाता में 1781 ई. में मदरसा बनाया था।


• 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट में यह प्रावधान था कि भारत के प्रत्येक जिले में एक फौजदारी तथा एक जिम्मेदारी न्यायालय की स्थापना की जाएगी तथा एक उच्चतम न्यायालय भी स्थापना की जाएगी इस एक्ट के अनुसार वारेन हेस्टिंग्स ने कोलकाता में एक उच्च न्यायालय जज इलिजा एम्पी को बनाया गया। साथ ही साथ उसने बंगाल के प्रत्येक जिले में एक-एक दीवानी तथा फौजदारी न्यायालय की स्थापना की।


• वारेन हेस्टिंग्स ने भारत को न्यायिक सेवा का जनक कहा जाता है


• वारेन हेस्टिंग्स के काल में ही 1784 इसवी में विलियम जेम्स ने एशियाटिक सोसाइटी ऑफ़ बंगाल की स्थापना की थी। यह संस्था भारत सहित एशिया के सभ्यता और संस्कृति पर शोध करते थी।

• गीता का अनुवाद वारेन हेस्टिंग्स के साथ ही चार्ल्स विलकिंस ने संस्कृति से अंग्रेजी में अनुवाद किया था



• इसी के समय 1782ई. में जोनाथन डंकन ने बनारस में एक संस्कृत कॉलेज की स्थापना की थी।


• इस्ट इंडिया कंपनी के कोषागार मुर्शिदाबाद से परिवर्तित कर वारेन हेस्टिंग्स में कोलकाता कर दिया।


• बंगाल का एक ब्राह्मण नंद कुमार ने वारेन हेस्टिंग्स पर यह आरोप लगाया था कि उसने मीर जाफर की पत्नी मुन्नीबाई से घुस लिया है। वारेन हेस्टिंग्स ने उसे सर इलिज इम्पे से मिलकर आरोप की झूठा साबित करवाया तथा नंदकुमार को फांसी दिलवा दी।


• 1784 में ब्रिटेन के संसद में पिट्स इंडिया एक्ट नामक कानून बनाया। इस कानून के कई प्रावधानों से वारेन हेस्टिंग से सहमत नहीं था। अतः वह अपने पद से इस्तीफा देकर इंग्लैंड चला गया इस पर ब्रिटेन के संसद में महाभियोग लगाया परंतु यह बाद में बरी हो गया।

जॉन मैंकफरसन

जब 1780 ईसवी में वारेन हेस्टिंग्स इस्तीफा देकर इंग्लैंड चला गया तो जॉन मैंकफरसन को 1785 से 86 तक बंगाल का गवर्नर जनरल नियुक्त किया गया इसके बाद कार्नवालिस गवर्नर जनरल बनकर भारत आया।