वेद क्या हैं? वेद कितने प्रकार के होते हैं ...


वेद क्या हैं ? 


वेद  का अर्थ होता है महत्व ज्ञान अर्थात ब्रह्मा का ज्ञान । वेद वैसे ग्रंथ को कहते हैं जिसे ब्रह्मण ज्ञान ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त होता है।

वेद संस्कृत भाषा में लिखा गया है वेदों के द्वारा आर्यों का इतिहास का पता चलता है।

वेद कितने प्रकार के होते हैं ?

वेद चार प्रकार के हैं
1.ऋग्वेद
2.आयुर्वेद
3.अर्थ वेद
4.सामवेद

1.ऋग्वेद 


ऋग्वेद में 10 मंडल 1028 सूक्त तथा 1060 मंत्र है। वेद के मंत्र पद में है अतः यह गया जाने लायक है।

गायत्री मंत्र ऋग्वेद से लाया गया है गायत्री मंत्र सूर्य की बेटी सविता को समर्पित है।
ऋग्वेद में सूर्य की दो बेटियां का जिक्र मिलता है सविता तथा आदिति सविता उगते हुए सूर्य को तथा आदिति डूबते हुए सूर्य को कहा गया है।

ऋग्वेद के मंत्र मुख्यतः देवताओं को समर्पित है ।यह माना जाता है कि मंत्रों के द्वारा देवताओं की स्तुति करने से देवता खुश हो जाते हैं तथा मनोवांछित फल देते हैं।

2.सामवेद

सामवेद भारतीय शास्त्रीय संगीत की जननी है इसमें संगीत के रागिनीयों की चर्चा है । ऋषियो ने संगीत की उत्पत्ति मंत्रों के गायन के लिए किया था।

3.अथर्ववेद

अथर्व वेद को अथवा आगीरस भी कहा जाता है । इसमें तंत्र मंत्र जादू टोना तथा वशीकरण की चर्चा है अर्थ वेद भी पद मे लिखा गया है।

4.आयुर्वेद

यजु शब्द युजुष से बना है जिसका अर्थ यज्ञ होता है तथा तथा वेद का अर्थ ज्ञान होता है ऐसा ज्ञान जिसे यज्ञ संबंधित सभी ज्ञान हो उसे अजुर्वेद कहते हैं 

वैदिक ऋषि अपनी इच्छा पूर्ति हेतु यज्ञ करते थे।वह मानते थे कि यज्ञ में दी गई आहुतियां तथा मंत्र को अग्नि देवता अन्य देवताओं तक पहुंचाते हैं।

यजुर्वेद गद्य और पद्य दोनों में लिखा मिलता है।

   ब्राह्मण ग्रंथ

ब्राह्मण ग्रंथ वेदों के अगली कड़ी के रूप में लिखा गया है प्रत्येक वेद के अपने -अपने ब्राह्मण ग्रंथ होते हैं पहले वेदों की रचना हुई उसके बाद ब्राह्मण ग्रंथ की।

  आरण्यक ग्रंथ


ऐसा ग्रंथ जिसे जंगलों में लिखा गया है उसे आरण्यक ग्रंथ कहा जाते हैं इस ग्रंथ में रहस्य आत्मा के ज्ञान है।

                      वेदांग


वेदों को समझने के लिए लिखे गए ग्रंथ को वेदांग कहते हैं
वेदांग की संख्या 6 है।

  • 1. शिक्षा - इस वेदांग में वेदों के मंत्रों के उच्चारण की विधियां बताई गई है।
  • 2. कल्प - इसमें कर्मकांड की विधि को समझाया गया है।
  • 3. व्याकरण - वेदों को समझने के लिए व्याकरण आवश्यक है।
  • 4. निरुक्त - इसमें  वेदों  में छिपे विज्ञान की चर्चा है इससे यासक ने लिखा है।
  • 5.छंद - छंद के प्रयोग करके ही वादों को लिखा जा सकता है वैदिक मंत्र भी पद में है आधार वैदिक मंत्रों के छंदों को समझने के लिए ही छंद वेदांग लिखा गया था।
  • 6. ज्योतिष  - वैदिक ज्योतिष को समझने के लिए ज्योतिष नामक वेदांग की रचना की गई।

                       उपनिषद


ऐसा ज्ञान जो गुरु के समर्पित बैठकर सिखा गया हो उसे उपनिषद कहते हैं।

उपनिषद को वेदांत भी कहा जाता है क्या विशुद्ध दर्शन की पुस्तक है।

जैसे- कंठ उपनिषद, केन उपनिषद, मुंडक उपनिषद, आदि प्रसिद्ध उपनिषद है।
सत्मेय जयते मुंडकोपनिषद से लिया गया है भारत आदर्श वाक्य यही है ।

                     स्मृतियां


भारतीय इतिहास में एक ऐसा कालखंड रहा है जब धार्मिक नियमों के आधार पर समाज और शासन चल रहा था । अतः धार्मिक नियमों सेसुगंधित कई ग्रंथ लिखे गए ऐसा ग्रन्थो को ही स्मृतियॉ कहा जाता है।

जैसे - मनुस्मृति, नारद स्मृति, प्रसार स्मृति आदि।

भारत की सबसे पुरानी स्मृति का ग्रन्थ मनुस्मृति है इसे मनुस्मृति ने लिखा । इसे भारत का पहला धार्मिक नियमों का ग्रंथ माना जाता है इसे भारत का पहला कानून का ग्रंथ माना जाता है।

   श्रौत सूत्र


सूत्र उसे कहा जाता है जो कम शब्द में लिखा गया ग्रंथ हो श्रौत सूत्र मे यज्ञ संबंघी में विधि-विधान का वर्णन है।

   गृह सूत्र


मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों का वर्णन गृह सूत्र में मिलता है कुछ महत्वपूर्ण संस्कार है। गर्भधारण, पुसवन, मुंडन, कानछेदन  आदी I

   शुल्व सूत्र


इस ग्रंथ में यज्ञ की वेदी कैसे बनाइ जाए इसका वर्णन है।

   धर्म सूत्र
इसमें धार्मिक नियमों का वर्णन है

             धार्मिक महाकाव्य


महाकाव्य उस ग्रंथ को कहा जाता है जिसमें किसी व्यक्ति के पूरे जीवन के बारे में कविता के रूप में लिखा गया हो।

भारत के 2 बड़े धार्मिक महाकाव्य है।
1. रामायण 
2. महाभारत

 1.  रामायण


इस ग्रंथ की रचना वाल्मीकि ने संस्कृत में किया था 400 ईसवी पूर्व 400 बीसी के आसपास वाल्मीकि ने रामायण लिखना शुरू किया था बाद में विद्वानों के द्वारा कई लोग इसमें जोड़ दिए गए इसका अंतिम रूप से संकलन 400 ईसवी पूर्व में किया गया था।

जब रामायण लिखा गया था तो उसमें 6000 स्लोक थे। इसके बाद उसमें 12000 स्लोक  गया वर्तमान में रामायण में 24000 स्लोक है।
रामायण भारत का प्रथम ग्रंथ है जिसका अनुवाद सबसे पहले मंडारिन भाषा में हुई थी । मडारिन चीन की भाषा है।

वैसे तो रामायण और महाभारत दोनों और अप्रमाणिक ग्रंथ माने जाते हैं परंतु रामायण महाभारत  से अधिक प्रमाणिक माना जाता है।

   2. महाभारत


महाभारत की रचना संस्कृत में वेदव्यास ने की थी महाभारत की रचना 400 ईसवी पूर्व से 400 ईसवी पूर्व के बीच माने जाते हैं।

इसका भी अंतिम रूप से संकलन 400 ईसवी पूर्व के आसपास की गई।

प्रारंभ में इसमें 8800 था तब इसे जय संहिता कहा जाता थाजब इसमें 2408 लोक हो गए तो इसे भारत कहा जाने लगा।

वर्तमान में इसमें 1लाख स्लोक है अतः इसे शत सहस्र संहिता कहा जाता है। शत सहस्र साहेब  संहिता को ही महाभारत कहा जाता है।

   3. श्रीमद्भागवत गीता


श्रीमद्भागवत गीता महाभारत की एक अध्याय है।

4. पुराण


पुराण कहानी के रूप में लिखा गया एक सहित है इसे लंबे समय तक अलग-अलग व्यक्तियों ने लिखा है पुराण की संख्या 18 है जिसमें सबसे प्राचीन पुराण मत्स्य पुराण है पुराणों में कई राजाओं की चर्चा की मिलती है।