बौद्ध साहित्य...




बुद्ध पाली भाषा में अपना उपदेश देते थे अधिकतर बौद्ध साहित्य वाली भाषा में लिखे मिलते हैं । कुछ बौद्ध सहित संस्कृत में भी लिखे


गए । जैसे - ललित विस्तार

बौद्ध साहित्य को पाली भाषा में पिटक कहा जाता था।
पिटक को तीन भागों में विभाजित किया जाता है।

1.सुत्त पिटक
2. विनय पिटक
3.अभिधाम पिटक

1. सुत्त पिटक 

सूत काअर्थ होता है उपदेश यथार्थ ऐसा बैद्ध सहित्य जिसमें बुद्ध के उपदेशों का वर्णन हो उसे सूट पिटक कहा जाता है।

2.विनय पिटक

इस ग्रंथ में बौद्ध के तरफ से बनाए ग्रन्थ भिक्षुओं के लिए नियम का के बारे में है।

3. अभिधम्म पिटक
इस ग्रंथ में बौद्ध दर्शन की व्याख्या की गई हैं इन तीनों पिटको को पाली भाषा में लिखा गया है। 

मिलिन्दपञओ

बौद्ध धर्म से संबंधित ग्रंथ है। यह पाली भाषा में लिखी गई है इसमें यूनानी राजा मिनांडर तथा बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच दार्शनिक वार्तालाप है । यह प्रश्न उत्तर के रूप में लिखी गई है।

दिव्यावदान

यह पाली भाषा में लिखा गया है यहां बौद्ध धर्म से संबंधित एक ग्रंथ है।

दीपू वंश तथा महा वंश

यह दोनों पाली भाषा में लिखा गया है बौद्ध धर्म से संबंधित ग्रंथ है।

ललित विस्तार

यह संस्कृत में लिखा गया बौद्ध धर्म से संबंधित ग्रंथ है।

जातक कथा

यह ग्रंथ पाली भाषा में लिखी गई है इसमें भूत के 549 पूर्व जन्मों का वर्णन है। सांची तथा भरहुत का स्तूप पर जातक कथा के चित्र मिलते हैं।

सदारानंद , सारिपुत्र प्रकरण तथा बुध चरित्र

सदारानंद ,सारिपुत्र प्रकरण तथा बुध चरित्र अश्वघोष की रचना है। यह पाली भाषा में लिखी गई है यह बौद्ध धर्म से संबंधित है।

सत सहरित्रका , प्रज्ञापारमिता तथा माध्यमिक सुत्र

ये तीनों ग्रंथ नागार्जुन के द्वारा लिखी गई है माध्यमिक सूत्र में नागार्जुन के सापेक्षता के सिद्धांत का वर्णन किया गया है ।अतः नागार्जुन को भारत का आइंस्टीन कहते हैं। ( E=m c१)

महावीर प्राकृतिक भाषा में अपना उपदेश देते थे अधिकतर जैन सहित प्राकृतिक भाषा में लिखे गए हैं प्राकृतिक भाषा में जैन सहित को आगम कहा जाता है।

आगम को 12अंगो तथा उपागो में विभाजित किया गया है। 

कुछ जैन सहित निम्नलिखित हैं।

1. भगवती सूत्र

इस जैन ग्रंथ में महावीर के जीवन का वर्णन मिलता है इसमें 16 महाजनपदों की चर्चा मिलते हैं।

2. आचरण सूत्र चिरांद

जैन ग्रंथों में जैनियों के लिए आचार नियम का वर्णन है।

3. विवाग सुयम सूत्र

इस जैन ग्रंथ में महावीर के द्वारा बनाए गए कर्म फल के सिद्धांत का वर्णन है।

4. कल्पसूत्र

इस जैन ग्रंथ को भदवाहु ने लिखा है इससे मौर्य काल के इतिहास का पता चलता है।

5. परिशिष्ट पर्व

यह हेमचंद्र की रचना है।

6. कथाकोश तथा चर्या पद

यह दोनों ग्रंथ जैन धर्म से संबंधित ग्रंथ है

जैन सहित का अंतिम रूप से संकुलन छठी शताब्दी (513 -526 )ईसवी में किए गए थे ।

यह संकलन गुजरात के बल्लभी में आयोजित एक जैन में की गई थी।

जैन साहित्य से बिहार तथा उत्तर प्रदेश के इतिहास का पता चलता है।

गैर धार्मिक साहित्यिक स्रोत

अर्थशास्त्र

यह चाणक्य के द्वारा संस्कृत में लिखा गया यह ग्रंथ है चाणक्य को विष्णुगुप्ता या कॉर्टिल कहा जाता है।

अर्थशास्त्र राजनीतिक शास्त्र की पुस्तक है अर्थशास्त्र 15 अधिकरण में तथा 180 प्रकरण में विस्तृत है।

इस ग्रंथ में यह वर्णन है कि कोई व्यक्ति कैसे राज्यसभा तक पहुंच सकता है तथा कैसे अपनी राज्य सत्ता को लंबे समय तक बनाए रखा सकता है इसके लिए चाणक्य ने सप्रसंग सिद्धांत दिया है । यह सिद्धांत में 7 महत्वपूर्ण चीजें आवश्यक है।

1.स्वामी 
2.जनपद (क्षेत्रफल तथा जनसंख्या )
3.अमात्य
4. कोष
5.किला ( दुर्ग)
6.मित्र (सहयोगी)
7. बल (सेना )

चाणक्य को भारत का मैकियावेली कहा जाता है।

अष्टाध्यायी 

यह पाणिनी के द्वारा संस्कृत में लिखा गया एक ग्रंथ है यह संस्कृत व्याकरण की पुस्तक है जिसमें पूर्व मौर्यकाल के सामाजिक राजनीतिक तथा आर्थिक इतिहास का पता चलता है।

महाभाष्य

यह अष्टाध्याई को समझने के लिए लिखा गया टिका है । इसे पतंजलि ने संस्कृत में लिखा था पतंजलि मित्र शुग का राज्यपुरोहित। पतंजलि ने पुष्यमित्र शुंग के लिए आष्टायोग मेघ योग यज्ञ करवाया था । इसमें पतंजलि ने यवन यूनानी आक्रमण की चर्चा की।

पतंजलि को योग का पिता कहा जाता है।

विदेशियों की यात्रा वृतांत

कई विदेशी यात्री भारत आया उन्होंने भारत के समाज आर्थिक स्थिति तथा राजनीति का अध्ययन किया इस अध्ययन के आधार पर उन्होंने कई पुस्तकें लिखी जिन्हें यात्रा वृतांत कहा जाता है।


यात्रा वृतांत निम्नलिखित विदेशियों के द्वारा लिखे गए।

1.यूनानी रोमन लेखकों के द्वारा लिखा गया यात्रा वृतांत

2. चीनी लेखकों के द्वारा लिखा गया यात्रा वृतांत

3. अरबी लेखकों के द्वारा लिखा गया यात्रा वृतांत


1.टेसीयस

यह सिकंदर के पूरे भारत आया था जिसने भारत के संबंध में यात्रा वृतांत लिखा है इसके यात्रा वृतांत विश्वास योग्य नहीं माने जाते हैं।

2.हेरोडोटस 

हेरोडोटस यूनान का निवासी था । इसे इतिहास का पिता कहा जाता है या सिकंदर से पूर्व भारत आया था।

सिकंदर के आगमन 326 ईसवी पूर्व भारत में होता है जबकि हेरोडोटस 500 ईसवी पूर्व भारत आया था

इसके यात्रा वृतांत का नाम हिस्टोरीका हेरोडोटस ने अपनी इस पुस्तक में भारत तथा फाइस (ईरान) के बीच होने वाले व्यापार के चर्चा किया है।

3.निर्याकस , अरिस्टो बुलस , अनेसिक्रिटस

यह तीनों इतिहास लेखन यूनान के थे जब 326 ई. पूर्व में सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया था । तब वे तीनों लेखक सिकंदर के साथ भारत आए थे इन्होंने भारत के संबंध में जो यात्रा वृतांत लिखे जो काफी विश्वसनीय मानी जाती हैं।

4.मेगास्थनीज

यह यूनान के राजा सेल्युकस निकेटर का राजदुत था जो चंद्रगुप्त मोर के दरबार में भारत आया था।


इस की पुस्तक का नाम इंडिका है इस पुस्तक में मेगास्थनीज ने भारत के रीति रिवाज का वर्णन किया है साथ ही साथ इसमें पटना के नगर प्रशासन के बारे में वर्णन किया है यह पुस्तक मौर्य वंश के इतिहास लेखन में सहायक है।

3.पुराण

यह सीरिया के राजा एंटीओकोस का राजदूत था जो बिंदुसार के दरबार में आया था बिंदुसार ने एंटी ओकोस को सुखी अंजीर पुरानी शराब तथा एक दर्शनिक की मांग की थी।

5. पेरिप्लस ऑफ द इरीथ्रियस सी 

पेरिप्लस का अर्थ होता है सर्वेक्षण तथा इरीथ्रियन सी हिन्द महासागर को कहा जाता है। यथार्थ पेरिप्लस ऑफ द इरीथ्रियन सी का अर्थ होता है हिंद महासागर का सर्वेक्षण।

इस पुस्तक के लेखक का पता नहीं है अतः इसको अज्ञातनाम लेखक के द्वारा लिखा गया है । इस लेखन के संबंध मे यह पता है कि वह यूनान के निवासी था बाद में रूम इटली आकर रहने लगा था इसने 80 AD के आसपास भारत की यात्रा की थी उन्होंने हिंद महासागर का सर्वेक्षण किया था यही कारण है कि इस पुस्तक में हिंद महासागर के तट के बंदरगाह के बारे में वर्णन किया है साथ ही साथ भारत रोम के बीच व्यापार के संबंध में भी वर्णन किया है।



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