राजनीति विज्ञान का अर्थ एवं परिभाषा


               राजनीतिक शास्त्र

वैसा शास्त्र जिसमें संपूर्ण राजनीति का अध्ययन किया जाता है उसे राजनीतिक शास्त्र कहते हैं ।
राजनीतिक शास्त्र का पिता अरस्तु को कहा जाता है

आधुनिक राजनीतिक शास्त्र का पिता मैंकवेली को कहा जाता है भारत का मैकियावेली चाणक्य को कहा जाता है चाणक्य का असली नाम विष्णुगुप्त था इसे कोटिल भी कहा जाता था इसकी पुस्तक का नाम अर्थशास्त्र है अर्थशास्त्र संस्कृत में लिखी गई एक राजनीतिक शास्त्र की पुस्तक है।
            
     राजव्यवस्था ---

यह राजनीतिक शास्त्र का एक भाग है इसके अंतर्गत किसी देश की शासन व्यवस्था के संबंध में अध्ययन किया जाता है।


    
राज्य (state) ----


आम बोलचाल की भाषा में राज्य का अर्थ प्रांत होता है जैसे बिहार राज्य उत्तर प्रदेश राज्य आदि ! परंतु राजनीतिक शास्त्र में राज्यों का अर्थ प्रांत नहीं होता है राजनीतिक शास्त्र में राज्य का अर्थ किसी देश की राजनीतिक संरचना से है राजनीतिक संरचना के अंतर्गत भारत सरकार ,संसद ,न्यायपालिका, विधानसभा ,नौकरशाह आईपीएस ,आईएएस आते हैं
राज्य एक अमृत संकल्पना है अमृत का अर्थ जिसे नंगी आंखों से देखा ना जा सके।
राज्य होने के लिए चार विशेषताओं की आवश्यकता है।

(1)भौगोलिक क्षेत्र
(2)जनसंख्या
(3)संप्रभुता
(4)सरकार

(1) भौगोलिक क्षेत्र

राज्य होने के लिए भौगोलिक क्षेत्र होना आवश्यक है।

(2) जनसंख्या

उस भौगोलिक क्षेत्र पर जनसंख्या का निवास आवश्यक है।

(3) संप्रभुता

जब कोई देश अपना संपूर्ण निर्णय आंतरिक दबाव में वह ना आकर करता हो कुुुुषल राष्ट्र देश कहा जाता है।

(4) सरकार

सरकार कुछ व्यक्तियों का समूह होता है इस देश पर शासन करता है भारत एक राज्य है।
     


                  : शासन के तंत्र :

मनुष्य अपने सभ्यता के जन्म से लेकर वर्तमान तक शासन के दो प्रमुख तंत्र विकसित किया है।

(1)राजतंत्र

इसके अंतर्गतराज का शासन राजा के हाथों में होती थी शासन की समस्त शक्ति राजा में केंद्रित होती थी अतः राजा निरंकुश हुआ करते थे |यही कारण है कि राजतंत्र को शासन के अच्छा तंत्र नहीं माना जाता है।
विश्व के अधिकतर देशों ने लोकतंत्र को अपना लिया है परंतु अभी भी कुछ ऐसे देश है जहां राजतंत्र है जैसे लीबिया सीरिया अरब के कुछ देश आदि।

(2)  लोकतंत्र

अमेरिकी राष्ट्रपति लिंकन के अनुसार लोकतंत्र जनता द्वारा जनता के लिए जनता पर किया गया शासन है।
लोकतंत्र शासन का सबसे अच्छा तंत्र माना जाता है !लोकतंत्र दो प्रकार के होते हैं।

(1) प्रत्यक्ष लोकतंत्र
(2) अप्रत्यक्ष लोकतंत्र

(1 )  प्रत्यक्ष लोकतंत्र

प्रत्यक्ष लोकतंत्र शासन में जनता सीधे-सीधे भाग लेती है। प्राचीनकाल में यूनान में प्रत्यक्ष लोकतंत्र था वर्तमान में स्विट्जरलैंड में प्रत्यक्ष लोकतंत्र की सर्वाधिक विशेषता पाई जाती है ।

(2)  अप्रत्यक्ष लोकतंत्र

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में जनता शासन में सीधे-सीधे भाग नहीं लेती है बल्कि अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से शासन करते हैं।
--विश्व की लगभग सभी देशों में अप्रत्यक्ष लोकतंत्र है! भारत में भी अप्रत्यक्ष लोकतंत्र हैं ।

              : राजनीतिक दलः

अप्रत्यक्ष लोकतंत्र में राजनीतिक दलों की व्यवस्था की जाती है ‌‌‌।ये राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों को चुनाव में उतारती है और जनता उसे मत देकर उसे प्रतिनिधि के रूप में चुनती है।
-विश्व में तीन प्रकार के राजनीतिक दल की व्यवस्था दिखती है।
(1) एकदलीय राजनीतिक व्यवस्था   
(2) द्विदर्लीय राजनीतिक व्यवस्था
(3) बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था

(1) एकदलीय राजनीतिक व्यवस्था -:

जब किसी देश के शासन में एक ही दल भाग लेता है तो उसे एक दलीय राजनीतिक व्यवस्था कहते हैं 
जैसे -चीन में एक ही कम्युनिटी पार्टी का शासन हमेशा रहता है   अतः चीन में एकदलीय राजव्यवस्था है।

 (2) द्विदर्लीय राजनीतिक व्यवस्था -:

जब किसी देश के शासन में दो दल भाग लेते हो तो द्विदर्लीय राजनीतिक व्यवस्था कहतेहै। जैसे- U.S.A तथा ब्रिटेन में।
         U.S.A में दो पाटिया है।
डेमोक्रेटिक दल एवं रिपब्लिकन दल
         ब्रिटेन में दो दल है।
कंजरवेटिव दह एवं लेब्राल दल

(3) बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था

जब किसी देश के शासन में कई दल भाग लेते हो तो उसे बहुदलीय राजनीतिक व्यवस्था कहते हैं I
जैसे -भारत-पाकिस्तान फ्रांस इटली नार्वे आदि।