मध्यकालीन भारत का इतिहास..



मध्यकालीन भारत का इतिहास

जब इतिहास में सामाजिक आर्थिक तथा राजनीतिक परिवर्तन बड़ी मात्रा में होती हो तब इतिहास का विभाजन किया जाता है । भारत में मुसलमानों के आने के साथ ही भारत के सामाजिक आर्थिक परिवर्तन होने लगा और इस काल के इतिहास को मध्यकाल का इतिहास कहा जाता है।


मध्यकाल को दो भागों में विभाजित किया गया है :-

1.सल्तनत काल
2.मुगल काल

1.सल्तनत काल

ये दोनों कल के शासक मुसलमान थे मुसलमान इस्लाम धर्म का समर्थक था।इस्लाम धर्म की स्थापना मोहम्मद पैगंबर ने की थी मोहम्मद पैगंबर का जन्म 570 ईसवी में अरब में हुआ था इस्लाम धर्म का पवित्र ग्रंथ कुरान है।

2.मुगल काल

सल्तनत काल के सुल्तान और अरब ,ईरान ,इराक के मुसलमान होते थे। जबकि मुगल काल के मुसलमानों का संबंध मंगोल वंश के शासकों से था।


जिहाद-

धर्म के विस्तार के लिए किया गया युद्ध जिहाद कहलाता है।

शिया सुन्नी-

मुसलमान के दो संप्रदाय होते थे

- सिया
- सुन्नी

सिया अपने को उच्च तथा सुन्नी अपने को निम्न मानते हैं।

खलीफा -

मोहम्मद पैगंबर के बाद इस्लाम धर्म जगत का नेता था। इस्लाम धर्म में गुरु को पीर तथा शिष्य को मुरीद कहा जाता है।


औलिया सूफी संतों को औलिया कहा जाता है

हिजरी संवत -

मोहम्मद पैगंबर का जन्म 570 इस्लामी हिजरी संवत माना जाता है।

     मध्यकालीन भारत का इतिहास

मध्यकालीन भारत के इतिहास को दो भागों में विभाजित किया है l


1.सल्तनत काल (1206 -1526ई.)
2.मुगल काल (1526 - 1857ई.)