भूगोल की परिभाषा क्या होती है



भूगोल धरातल के भू आकृतियो अर्थात पर्वत, पहाड़, मैदन आदि के साथ-साथ वायुमंडल का भी अध्ययन करता है । धरातल पर स्थित  सभी जीवो के अध्ययन भी भूगोल कहलाता है ।धरातल के अंदर के अध्ययन को भूगर्भ शास्त्र कहा जाता है । भूगोल का पिता हिकेटियस को माना जाता है हिकेटियस  यूनान के रहने वाले थे।
              पृथ्वी ( Earth)

पृथ्वी के आकार लवक्ष गोलाभ जैसा है। पृथ्वी का मॉडल ग्लोब है।

             मानचित्र ( map )

संपूर्ण धरातल का या धरातल के किसी भाग के चित्र जब कागज पर बनाया जाता है तो उसे मानचित्र करते हैं।

कई मानचित्र के पुस्तकों को एटलस कहते हैं।

धरातल का वह भाग जो चट्टानों से बना होता है स्थल कहलाता है।

धरातल का वह भाग जो जल द्वारा निर्मित होता है जलीय भाग कहलाता है।धरा  पर स्थल 29% तथा जल 71%  है।

           महादेश / महाद्विप (continent)

धरातल का वह बड़ा भूखंड  जिसमें भौगोलिक एवं संस्कृति एकता पाई जाती है महादेश एवं महाद्वीप कहलाते हैं।

महाद्वीपों की संख्या 7 है।

1.एशिया

2.इरोप

3.अफ्रीका


4.उत्तरी अमेरिका


5.दक्षिणी अमेरिका


6.ऑस्ट्रेलिया


7.अंटार्कटिका


 सबसे बड़ा महादेश एशिया महादेश है ।तथा सबसे छोटा महादेश ऑस्ट्रेलिया महादेश है।

ऑस्ट्रेलिया महादेश को ही असनिया महादेश कहा जाता है। अंटार्कटिका महादेश दक्षिणी ध्रुव (south pole) के चारों ओर फैला है। अंटार्कटिका एकमात्र महा देश है जहां जनसंख्या निवास नही करती।

अंटार्कटिका पर कई देश के शोध केंद्र है भारत के 3  शोध केंद्र है।

-दक्षिण गंगोत्री
-मैत्री
-भारती

एशिया को यूरोप से यूराल पर्वत अलग करता है।

              महासागर  (Ocean)

विशाल जल राशि वाले भूभाग को महासागर कहते हैं

पांच महासागर है

1.प्रशांत महासागर
2.अटलांटिक महासागर
3.हिंद महासागर
4.अंटार्टिका महासागर

सबसे बड़ा महासागर प्रशांत महासागर है सबसे छोटा महासागर अटलांटिक महासागर है।' S' आकार का महासागर अटलांटिक महासागर है ।बर्फ से ढका महासागर अटलांटिक महासागर है ।उत्तरी ध्रुव के चारों ओर फैला महासागर अटलांटिक महासागर है।

हिंद महासागर का नाम है हिंदुस्तान के नाम पर है।

                  सागर  ( Sea )

धरातल पर वैसे विशाल जल राशि जो महासागर से छोटी होती है सागर कहलाती है।

जैसे- भूमध्य सागर
        लाल सागर
        पीला सागर
        अरब सागर

                   खाड़ी  (Bay)

खाड़ी भी धरातल पर विशाल जल राशि वाला भाग है। जब धसे हुए स्थल -खंड में जल राशि प्रवेश कर जाती है तो उसे खाड़ी कहा जाता है।

                    झील ( Lake )

जो छोटी जल राशि होते हैं जो पढ़ाया और स्थल से गिरी होते हैं परंतु तटीय क्षेत्र में भी झील पर जाते हैं।

जैसे -आंध्र प्रदेश के पुलिकट झील

तटीय क्षेत्र में पाए जाने वाले जीव को लैगून झील कहते हैं।

                    नदी  (River)

धरातल पर जब कोई जलधारा बहती है तो उसे नदी करते हैं।

नदी दो प्रकार के होते हैं

1.अस्थाई नदी
2.स्थाई नदी

1.अस्थाई नदी

बरसात के दिनों में वर्षा की बूंदे संग्रहित होकर छोटी-छोटी जलधारा निर्मित करती है । जिसे अस्थाई नदी कहा जाता है ।
जैसे -वर्षा का पानी

2.स्थाई नदी

जब धरातल पर जलधारा कुछ महीने या साल भर बहती रहती है तो उसे स्थाई नदी करते हैं।

अस्थाई नदी दो प्रकार की होती है :-

I .सदावाहिनी नदियां
II.बरसाती नदी

1.सदावाहिनी नदिया

जिस नदी में सालों भर जल रहता है उसे सदा वाहिनी नदिया कहते हैं।
सदावानी नदियाँ पर्वतों पर स्थित हिमानी से निकलती है।
भारत में हिमालय से निकलने वाली नदी सदा वाहिनी है क्योंकि यह नदियां ग्लेशियर से निकलते हैं।
जैसे गंगा गंगोत्री ग्लेशियर यमुना से।
       यमुना यमुनोत्री गैलेक्सी  से।

2.बरसाती नदी

जिस नदी में कुछ ही महीने जल रहता हो तथा कुछ महीने सूखी पड़ी रहती हो उसे बरसाती नदी कहते हैं।
बरसाती नदी में कम ऊंचे पर्वत से या पहाड़ों से या पठार से निकलती है जहां ग्लेशियर का अभाव होता है।
बरसात के दिनों में ही ऐसी नदियों में जल होता है दक्षिण भारत की सभी नदियां बरसाती नदियां के उदाहरण है।
जैसे- नर्मदा, कावेरी, ताप्ती, गोदावरी ,कृष्णा इत्यादि।

                   उद्गम / मुहाना

जिस स्थान से नदियां निकलती है उसे उद्गम कहते हैं और जिस स्थान पर सागर से निकलती है उसे मुहाना कहा जाता है।

                   डेल्टा /एश्चुरी

मुहाने तक जाते-जाते नदी बूढ़ी हो जाती है अतः उसमें मालवा ढोने की शक्ति नहीं रह जाते वह अपने मलवा को जहां-तहां (छोड़कर) निक्षेपित कई जलधारा में  विभाजित हो जाती है जिससे एक डेल्टानुमा आकृति का निर्माण होता है जिसे डेल्टा कहा जाता है।
जैसेगंगा ब्रह्मपुत्र का सुंदरवन का डेल्टा या विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा है।

               एश्चूअरी  (ज्वारनदमुद)

जब सागर का जवाब ज्वार नदियों के मुहाने पर मालवा जमने नहीं देती तो नदिया एक जलधारा के रूप में सागर में मिल जाती है । उसे एश्चुअरी कहा जाता है।
जैसे- 1. नर्मदा का एश्चुअरी
        2. ताप्ती का एश्चुअरी
        3.पश्चिम घाट पर्वत से अरब सागर में मिलने वाली नदिया एश्चुअरी बनाती है।

         जलसंधि / जलडमरूमध्य (strait)

जब दो बड़े अस्थल खंड के बीच संकणी जल राशि स्थित हो तो उसे जलसधि कहते है ।

जैसे- पाक जलसंघि (भारत और श्रीलंका के बीच)